तुलसीदास जी को भगवान राम जी के दर्शन कैसे हुए?


 

तुलसीदास जी ने बहुत लंबे समय से एक नियम बना रखा था। वह जब भी शौच  जाते शौच  का बचा पानी वह एक बेर के पेड़ में डाल देते। यह नियम लंबे समय से बना रखा था जो बेर का पेड़ था। वह सूख रहा था। तुलसीदास जी के डाले पानी से बेर का पेड़  हरा भरा हो गया था। उस बेर के पेड़ में एक प्रेत रहता था। एक दिन जब तुलसीदास  जी बेर के पेड़ में पानी डाल रहे थे, उसमें से एक प्रेत प्रकट हो गया। उस प्रेत  में कहा  तुलसीदास तुमने मुझे पानी पिला कर संतुष्ट कर लिया मुझसे कुछ वर मागो । 



 तुलसीदास जी श्री राम जी के बहुत बड़े भक्त थे तब तुलसीदास जी ने कहा हे प्रेत  तुम्हारे अंदर सामर्थ है तो मुझे श्री राम जी के दर्शन करा दो। मेरी यही इच्छा है तब प्रेत ने कहा, तुलसीदास मैं तुम्हें श्री  राम जी से मिला नहीं सकता पर  श्री राम जी से मिलने का मार्ग बता सकता हूं।तब प्रेत ने कहा जब तुम श्री राम जी की कथा सुनाते हो,, वह आखिर में जो आदमी आता है, कंबल ओढ़ कर उसका उसके पांव पकड़ लेना वह हनुमान जी है। तुम्हें राम जी के दर्शन हो जाएंगे।तब प्रेत  ने कहा, जहां भी राम कथा होती है वह हनुमान जी अवश्य आते हैं। अगले दिन तुलसीदास जी ने राम कथा सुनाने के बाद उस आदमी के पांव पकड़ लिया

तब उस व्यक्ति ने कहा, तुमने मेरे पाँव क्यों पकड़ रखे हैं? श्री राम जी के पांव पकड़ो। तब तुलसीदास जी  ने कहा।  हनुमान जी, मैं आपको पहचान गया। मुझे दर्शन दो तब हनुमान जी को गोस्वामी तुलसीदास जी को दर्शन दिया तब  हनुमान जी के द्वारा गोस्वामी तुलसीदास जी को चित्रकूट में श्री राम जी के दर्शन हुए।