गणेश जी के भक्त की कहानी 

एक छोटा सा लड़का था। वह बचपन से ही गणेश जी का बहुत बड़ा भक्त था।वह बचपन से ही गणेश जी को भोग लागता था, फिर वह खाना खाता था। एक  दिन उस लड़के का अपने माता से झगड़ा हो गया और वह घर से निकल गया।  वह घर से जाते जाते  बोला, आज मैं गणेश जी से मिलकर ही घर लौट लौटूंगा । नही तो घर नही लौटूंगा वह लड़का घर से बहुत दूर निकल गया और वह लड़का चलता रहा  और  भगवान गणेश का नाम लेता रहा। वह भगवान गणेश का नाम लेते लेते वह  घने जंगल में पहुंच गया। मगर उसे गणेश जी कहीं नजर नहीं आए।चलते चलते रात हो गई, लेकिन उसे गणेश जी कहीं नजर नहीं आए।,मगर गणेश जी सोच रहे थे। इस लड़के ने मेरे नाम से घर छोड़ा है। मैंने इसे घर नहीं छोड़ा तो  यहां जंगली जानवर इसे मार देंगे।



फिर गणेश जी एक बूढ़े  ब्राह्मण का रूप बनाकर आए। वह ब्राह्मण ने पूछा, बेटा तू कहां जा रहा है वह लड़का बोला, मैं गणेश जी से मिलने जा रहा हूं।फिर वो ब्राह्मण बोला, मैं ही गणेशजी हूं। वह लड़का बोला, तुम गणेश जी नहीं हो सकते फिर  गणेश जी अपने असली रूप में आ गए। वह लड़का गणेश जी को देख कर बहुत खुश हुआ।फिर गणेश जी बोले, तुम्हें जो भी मुझसे मांगना है मांग लो मगर एक ही बार में मांग लेना।उस लड़के ने एक ही बारी में गणेश जी से धन दौलत वैभव यश मांग लिया।गणेश जी, उसे आशीर्वाद देकर अंतर्ध्यान हो गए।जब वह लड़का घर पहुंचा, वह अपनी माता को देख कर बहुत खुश हुआ। वह बोला अपनी माता से देखो माँ ,  मैंने आज  गणेश जी से सब कुछ मांग लिया।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है जो भगवान की सच्ची भाव से पूजा करता है और भगवान पर विश्वास रखता है । भगवान उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं।