एक गांव मे  एक गरीब महिला रहती थी। वह हमेशा हनुमान जी की पूजा करतीं  और वह हमेशा हनुमान जी को भोग लगाती  थी।  और फिर वह भोजन जल  ग्रहण करती थी।  वह हमेशा हनुमान जी को रोटी का चूरमा का भोग लगती  थी।  और खाली समय मे हनुमान जी को याद करती थी।  उसकी बचपन से यह दिनचर्या थी। 



एक दिन उस बूडी औरत ने अपने बेटे की शादी कर दी।  एक दिन की बात है।  एक दिन बूढ़ी औरत  हनुमान जी को भोग लगा रही थी।    उसकी बहु ने कहा।   माता जी  घर मे खाने को थो खाना नहीं है।  और आपको हनुमान जी को भोग  लगाने की धुन सावर  है।   परन्तु वह नही मानी फिर उसकी बहु ने उसको कमरे मे बंद कर दिया।  

वह महिला 6 दिन तक कमरे मे बंद रही।  वहा उसके बेटे की नौकरी छूट गयी वह भूक से तपड़ने लगे।  7वे दिन कमरे मे महिला बंद थी वहा  एक पंडित प्रकट हुए उस महिला को वही रोटी का चूरमा दिया।  उस महिला ने चूरमा लेने से मना कर दिया और कहा आज तो आप खिला रहे हो कल से कौन खिलाएगा फिर पंडित ने कहा मे रोज आऊंगा तुम्हे भोजन कराने।  तब महिला ने भोजन स्वीकार कर लिया।  तब एक दिन बहु को सास का ध्यान आया और उसने देखा सास बिकुल ठीक है।  और वह भोजन कर रही थी।  यह देखकर बहु को बहुत गुस्सा आया।  और बहु ने ताने मरते हुए कहा अब आप मंदिर नही जयोगी और हनुमान जी को भोग नही लगाओग।  फिर वह महिला बोली मे मरते दम तक मंदिर जाउंगी।  हनुमान जी को भोग भी लगाओगी।  और बहु ने फिर भोजन के बारे मे पूछा तो महिला ने हनुमान जी किरपा की बारे मे बताया। 



  यह सुनकर बहु को अपनी गलती का अहसास हुआ।   

कहा  जाता है जो हनुमान जी की सच्चे मन से पूजा करते है हनुमान जी हमेशा उसके साथ रहते है।  उसकी हर संकट मे उसकी मदद करते है।