सेवा करने का फल कैसे मिलता है 

एक राजा बूढ़ा  हो गया था   उसकी कोई संतान नही थी ।  उसे लगा मे अपना राज्य किसे  सोपू  कोई योग्य मिले फिर सोपू उसने अपने राज्य मे डिंडोरा पिटवा दिया।   मे कल सबकी  परीक्षा  लूंगा।  जो  परीक्षा  पास जो जायेगा उसे मे राजा बना दूंगा।  अगले दिन मंत्री और राज्य के लोग आये मगर राजा कोई ठीक नही लगा 

पास के गांव मे बच्चे को पता चला।  उसके पिता जी मजदूरी करते थे    उस बच्चे को पता चला राजा बुड्ढे हो गए है वह परीक्षा लेंगे   पास हो गया तो राजा बना देंगे वह बच्चा केवल 18  वर्ष का था।  उसके पिता जी मजदूरी करते थे  उसके पास जायदा पैसे भी नही थे। उस बच्चे ने अपने  पिता जी से  पैसे मांगे उसके पिता ने बोला तू मजदूर का बेटा है तू पास थोड़े न होगा वहा तो बड़े  बड़े राजा आयगे। उसने जिद करृगे अपने पिता जी 200 रूपए मांगे \ 




उसने अपने लिए  बढ़िया कोट पेंट बनवाये वह कोट पेंट पहनकर  चला । जब वह उस राज्य मे पहुंचा उसने देखा एक बूढ़ा आदमी को ठंड लग रही थी उस बूढ़ा आदमी ने बोला  भैया आप कहा जा रहे हो इस बच्चे ने बोला राजा के यहां परीक्षा देने जा रहा हू। इस बूढ़ा आदमी ने बोलै मुझे बहुत ठण्ड लग रही है किओ कपडे है थो दे दो। इस बच्चे के पास कोट बहुत मोटा था।  मगर इसने कोट के अंदर गन्दी कमीज पहन लगी थी। उसने अपनी कोट उत्तार कर इस बुड्ढे आदमी को उड़ा दिया।  इसने सोचा सिर्फ राजा मुझे फ़ैल थो करेंगे कम से कम मेरे वजह से ये बीमार होने से बच तो जायेगा।  वह कोट देकर राज्य मे पंहुचा।  मंत्री ने कहा बैठो राजा आ रहे है 




जब इस बच्चे ने राजा को देखा  तो वह राजा को देकर दंग रह गया वह बूढ़ा आदमी  और कोई  नही राजा यही था वह परीक्षा ले रहा था वह सबकी परीक्षा ले रहा था।  राजा बनने के लिए कोई उसकी मदद नही कर थे।  राजा ने देकते ही गले लगा दिया और उसे राजा बना दिया।   मंत्रियो ने पूछा राजा आपने इसकी परीक्षा ली ही नही।  राजा ने कहा जो दुसरो की मदद करता है मे उसे राजा बना देता हू। 

भगवान भी उन्ही को  सब कुछ देते है जिनका भाव सेवा का होता है|